काशी में विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय को समर्पित विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन का काशी हिंदू विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन किया। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय अधिवेशन में देश-विदेश से आए करीब 1200 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।अधिवेशन में वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ वैज्ञानिक एवं सामाजिक चुनौतियों पर मंथन कर वैज्ञानिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की कार्ययोजना तैयार करने पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
कार्यक्रम में ‘वन हेल्थ’, विकसित भारत के लिए ‘नेट ज़ीरो’, ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नैतिकता’ जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही प्राचीन वैदिक ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय के मॉडल पर भी व्यापक चर्चा हो रही है, ताकि भारतीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिल सके।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय परंपरा, जीवनशैली और ज्ञान की शक्ति को पूरी दुनिया ने देखा। भारत ने महामारी की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया और दुनिया को नई दिशा देने का कार्य किया।
उन्होंने वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और चिंतकों से आह्वान किया कि भारतीय परंपराओं और प्राचीन वैज्ञानिक ज्ञान को आधुनिक विकास की धारा से जोड़कर विकसित भारत के संकल्प को गति दें।अधिवेशन के दौरान बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी, विचारक हरीश चंद्र शर्मा और बीएचयू के मनु वशिष्ठ सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। यह अधिवेशन विज्ञान, संस्कृति और नवाचार के संगम के रूप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


