बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 29 जून को पवित्र गुफा में प्रथम पूजा-अर्चना कर वार्षिक अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ किया। श्रद्धालुओं के लिए यात्रा 3 जुलाई से शुरू होगी और 28 अगस्त तक जारी रहेगी। कई यात्री जम्मू पहुंच चुके हैं और बेस कैंपों से आगे की यात्रा भी शुरू कर चुके हैं।इस बार यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए प्रशासन ने कई नई व्यवस्थाएं की हैं। पूरे यात्रा मार्ग पर AI तकनीक से लैस ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी रखी जाएगी, ताकि सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सके।
यात्रियों की सुविधा के लिए जम्मू के तवी रिवरफ्रंट पर नया इंटीग्रेटेड फैसिलिटेशन सेंटर बनाया गया है। 2 जुलाई को यहां श्रद्धालुओं के पहले जत्थे का स्वागत किया जाएगा। इसी केंद्र पर मेडिकल जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और जिन श्रद्धालुओं का पंजीकरण नहीं हुआ है, उनका ऑन-द-स्पॉट रजिस्ट्रेशन भी किया जाएगा।नए फैसिलिटेशन सेंटर में करीब 4,000 श्रद्धालुओं के ठहरने की निशुल्क व्यवस्था की गई है। यात्रा के दौरान थकान, अस्वस्थता या अन्य किसी कारण से रुकने वाले यात्री यहां आराम कर सकेंगे।
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अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने इस बार पंजीकृत श्रद्धालुओं के लिए 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर उपलब्ध कराया है। इसके अलावा सभी पंजीकृत यात्रियों को दुर्घटना बीमा का लाभ भी मिलेगा।यात्रा के लिए प्रशासन ने कुछ नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य किया है। श्रद्धालुओं को RFID कार्ड और अनिवार्य मेडिकल सर्टिफिकेट अपने साथ रखना होगा। RFID कार्ड के माध्यम से बालटाल और चंदनवाड़ी (पहलगाम) मार्ग के प्रवेश द्वारों पर बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही प्रवेश मिलेगा। वहीं, मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर डॉक्टरों की टीम जरूरत पड़ने पर यात्रियों के स्वास्थ्य की जांच भी करेगी।
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