काशी की सांस्कृतिक पहचान और विश्व प्रसिद्ध बनारसी साड़ी की परंपरा को समर्पित "रेशम और रिवायत – सांस्कृतिक फैशन शो एवं बुनकर सम्मान समारोह" का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बनारसी साड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी को मंच पर प्रदर्शित करने के साथ ही उन बुनकरों को सम्मानित किया गया, जिनकी मेहनत और कला ने बनारसी वस्त्रों को वैश्विक पहचान दिलाई है।कार्यक्रम का शुभारंभ प्रसिद्ध महिला चिकित्सक डॉ. दीपाली गुप्ता द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद प्रस्तुत की गई गणेश वंदना ने पूरे सभागार को भक्तिमय वातावरण से भर दिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच बनारसी साड़ी पर आधारित फैशन शो आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। फैशन शो में मॉडल्स ने बुनकरों द्वारा तैयार की गई आकर्षक बनारसी साड़ियों को पहनकर रैंप वॉक किया। रैंप पर बनारस की परंपरा, शिल्पकला और रेशमी सौंदर्य का अनूठा संगम देखने को मिला। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ प्रस्तुति का स्वागत किया।
कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने लोकनृत्य, संगीत और लघु नाटिकाओं के माध्यम से बनारस की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया और आयोजन को यादगार बना दिया।आयोजक वर्तिका जायसवाल ने कहा कि “रेशम और रिवायत केवल एक फैशन शो नहीं, बल्कि उन बुनकरों के श्रम, समर्पण और कला को सम्मान देने का प्रयास है, जिन्होंने बनारसी साड़ी को दुनिया भर में पहचान दिलाई है। हमारा उद्देश्य नई पीढ़ी को इस विरासत से जोड़ना और बुनकरों के योगदान को सम्मानित करना है।”समारोह के दौरान शहर के वरिष्ठ बुनकरों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। कई बुनकरों ने मंच से अपने अनुभव और संघर्ष साझा किए, जिससे उपस्थित लोग भावुक हो उठे। आयोजन में शहर के गणमान्य नागरिकों, कला प्रेमियों, फैशन जगत से जुड़े लोगों तथा बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लेकर बुनकरों का उत्साहवर्धन किया।समापन अवसर पर आयोजकों ने कहा कि "रेशम और रिवायत" को आगामी वर्षों में भी आयोजित कर बनारसी बुनकरी और काशी की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास जारी रहेगा।


