भारतीराजा ने कहा अलविदा: चार दशकों तक सिनेमा को दी नई पहचान

तमिल सिनेमा के दिग्गज निर्देशक और पद्मश्री सम्मानित फिल्ममेकर भारतीराजा का बुधवार को 84 वर्ष की आयु में चेन्नई में निधन हो गया। समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से तमिल फिल्म उद्योग सहित पूरे भारतीय सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। भारतीराजा भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा निर्देशकों में शामिल थे जिन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से ग्रामीण जीवन, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ को बड़े पर्दे पर नई पहचान दी। अपने शानदार करियर के दौरान उन्हें छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, चार साउथ फिल्मफेयर पुरस्कार, छह तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार और एक नंदी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2004 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया था। भारतीराजा ने वर्ष 1977 में फिल्म '16 वयाथिनिले' से निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। इसके बाद चार दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने 40 से ज्यादा फिल्मों का निर्देशन किया। 

तमिल सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें 'इयक्कुनर इमयम' (निर्देशकों का शिखर) की उपाधि दी गई थी। उनकी चर्चित फिल्मों में 'किझाके पोगुम रेल', 'सिगप्पु रोजक्कल', 'अलैगल ओइवथिल्लई', 'काधल ओवियम' और 'मुधल मरियाथाई' शामिल हैं। उन्होंने बॉलीवुड में भी अपनी पहचान बनाई और 'सोलवा सावन' (1979), 'रेड रोज' (1980) तथा 'सवेरे वाली गाड़ी' (1986) जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। फिल्म 'रेड रोज' में अभिनेता राजेश खन्ना और अभिनेत्री पूनम ढिल्लों मुख्य भूमिका में नजर आए थे। निर्देशन के अलावा भारतीराजा ने अभिनय के क्षेत्र में भी अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने 'आयुध एझुथु', 'पांडियनाडु', 'ईस्वरन', 'थिरुचित्रम्बलम' और 'महाराजा' जैसी फिल्मों में अभिनय किया। 

उनकी अनरिलीज फिल्म 'पुलवर' बतौर अभिनेता उनकी आखिरी फिल्म होगी। उनके निधन पर अभिनेत्री खुशबू सुंदर समेत कई फिल्मी हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया। खुशबू ने कहा कि भारतीराजा का जाना तमिल सिनेमा के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि उनकी फिल्में आने वाली पीढ़ियों के लिए फिल्म निर्माण की पाठशाला बनी रहेंगी। साथ ही उन्होंने बताया कि निर्देशक के साथ एक फिल्म करने की उनकी इच्छा अब अधूरी रह गई। भारतीराजा के निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे फिल्मकार को खो दिया है, जिसने अपनी रचनात्मक दृष्टि और अनूठी कहानी कहने की शैली से सिनेमा को नई दिशा दी। उनकी फिल्में और योगदान हमेशा याद किए जाएंगे।


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