कर्नाटक की नई सरकार के गठन के महज चार दिन बाद ही अंदरूनी नाराजगी खुलकर सामने आ गई। वरिष्ठ मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने विभागों के बंटवारे से नाराज होकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को व्हाट्सएप पर अपना इस्तीफा भेज दिया। हालांकि, मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि सभी मतभेद सुलझा लिए गए हैं और सरकार में सब कुछ सामान्य है।रामलिंगा रेड्डी का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने उन्हें बेंगलुरु विकास मंत्रालय देने का वादा किया था, लेकिन शपथ ग्रहण के बाद उन्हें सिंचाई मंत्रालय सौंप दिया गया। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने शुक्रवार को इस्तीफा भेज दिया, जिससे नई सरकार की मुश्किलें बढ़ गईं।मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को पुष्टि की कि रेड्डी ने व्हाट्सएप पर इस्तीफा भेजा था।
उन्होंने कहा, "वह मेरे सबसे करीबी दोस्तों में से एक हैं। सभी समस्याओं का समाधान कर लिया गया है। अनावश्यक कहानियां न बनाई जाएं। हां, उन्होंने इस्तीफा भेजा था, लेकिन अब मामला सुलझ चुका है।"इस्तीफे के बाद शुक्रवार देर रात मुख्यमंत्री और रेड्डी के बीच करीब दो घंटे लंबी बैठक हुई। राजनीतिक जानकार इसे सरकार के सामने खड़े पहले बड़े संकट को टालने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के बाद सरकार के भीतर असंतोष की खबरें और तेज हो गई हैं।केएच मुनियप्पा, जिन्हें खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग दिया गया है, ने भी अपने मंत्रालय को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कैबिनेट के सबसे वरिष्ठ सदस्यों में होने के नाते उन्हें अधिक महत्वपूर्ण विभाग मिलना चाहिए। मुनियप्पा ने बताया कि उन्होंने अपनी बात पार्टी नेतृत्व और राहुल गांधी तक पहुंचा दी है।वहीं, सतीश जारकीहोली ने भी कहा कि वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (KPCC) का पद चाहते थे और इस संबंध में पार्टी आलाकमान से अनुरोध किया था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह नेतृत्व के फैसले का सम्मान करेंगे।
सरकार पर उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि मंत्रिमंडल में अभी कई पद खाली हैं और आगामी विस्तार में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।गौरतलब है कि 3 जून को डीके शिवकुमार ने 13 मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन सरकार के गठन के कुछ ही दिनों बाद विभागों को लेकर सामने आई नाराजगी ने कांग्रेस नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।


