वाराणसी। मछोदरी स्थित वैश्य कुल गुरु मठ सभागार में “साहित्य की डोर, पूरब की ओर” मंच के तत्वावधान में साहित्य सम्मान समारोह एवं अखिल भारतीय मुशायरे का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व मंच के अध्यक्ष एवं ग़ज़लकार गोपाल केसरी ने किया। साहित्यिक आयोजन में शहर के प्रबुद्धजनों, कवियों, शायरों एवं साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि दीपक दबंग, विशिष्ट अतिथि भुलक्कड़ बनारसी, संस्था के संरक्षक विनोद तलवार, राजू माहेश्वरी, अंजनी मिश्रा, विनय केशरी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कंचन सिंह परिहार, प्रबंधक राजकीय पुस्तकालय ने की।
समारोह में संस्था की ओर से संरक्षक मंडल को ‘साहित्य सेवा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। वहीं सभी आमंत्रित कवियों एवं शायरों को प्रशस्ति-पत्र एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।मुशायरे में ग़ज़लकार गोपाल केसरी ने अपनी रचना “गली-सड़क न बचा है कोई चौराहा, आखिर कहाँ हम वतन की बात करें…” सुनाकर सामाजिक सरोकारों को स्वर दिया, जिस पर सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
इसके बाद खलील अहमद ‘राही’ ने एकता और भाईचारे का संदेश देती ग़ज़ल प्रस्तुत की। आशिक बनारसी ने साहित्य की शक्ति पर अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुति दी। आनंद कृष्ण ‘मासूम’ ने श्रृंगार रस से ओतप्रोत रचना सुनाई, जबकि संतोष कुमार ‘प्रीत’ ने उम्मीद और बदलाव की बात अपनी कविता के माध्यम से रखी।राम जतन ‘सज्जन’ ने मां के स्नेह और विरह पर आधारित भावपूर्ण कविता सुनाई। परमहंस ‘परम’ ने जीवन के संघर्ष और अभावों को अपनी रचना में पिरोया। मुख्य अतिथि दीपक दबंग ने अपनी प्रस्तुति से सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
गिरीश पांडेय ‘काशिकेय’ ने मानवीय मूल्यों पर आधारित रचना प्रस्तुत की, जबकि प्रख्यात कवयित्री डॉ. नसीमा निशा ने गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सौहार्द पर केंद्रित कविता सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। कवयित्री करुणा सिंह ने बदलते समय और जीवन के अनुभवों को अपनी कविता के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन मंच के अध्यक्ष एवं ग़ज़लकार गोपाल केसरी तथा संतोष कुमार ‘प्रीत’ ने संयुक्त रूप से किया। अंत में कोषाध्यक्ष सुनील कुमार चौरसिया एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरीश कुमार पाण्डेय ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।देर रात तक चले इस साहित्यिक आयोजन में कवियों और शायरों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया और पूरा सभागार तालियों की गूंज से सराबोर रहा।



