नागरी नाटक मंडली न्यास एवं भारतेन्दु नाट्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला-2026 के अंतर्गत सुमन पाठक के निर्देशन में नाट्य प्रस्तुति ‘ऋतं वदिष्यामि’ का सफल मंचन किया गया। संगीत, नृत्य, गायन और नाट्य कला के समन्वय से सजी इस प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।नाटक का शुभारंभ ऋग्वेद के नासदीय सूक्त से हुआ, जिसके बाद ऋषियों को चारों वेद प्रदान किए जाने और उनके सस्वर पाठ का मंचन किया गया। सामवेद गायन की प्रस्तुति विदुषी सुचरिता गुप्ता के निर्देशन में बालिकाओं ने दी। वहीं ओडिसी नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति भी दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रही।
नाट्य क्रम में देवासुर संग्राम, समुद्र मंथन, शिव तांडव की उत्पत्ति तथा माता पार्वती द्वारा लास्य नृत्य की उत्पत्ति का सजीव चित्रण किया गया। शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।कार्यशाला में संगीत एवं गायन का प्रशिक्षण सुचरिता गुप्ता, भरतनाट्यम का प्रशिक्षण डॉ. दिव्या श्रीवास्तव, ओडिसी का प्रशिक्षण राहुल मुखर्जी तथा कथक का प्रशिक्षण शिवानी मिश्रा एवं सुनिधि पाठक द्वारा दिया गया।
नागरी नाटक मंडली के 29वें ग्रीष्मकालीन शिविर के प्रथम चरण में छोटे बच्चों तथा नृत्य-गायन वर्ग के विद्यार्थियों की यह प्रस्तुति विशेष रूप से सराही गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।इस अवसर पर भारतेन्दु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. रतिशंकर त्रिपाठी, नागरी नाटक मंडली न्यास के अध्यक्ष डॉ. संजय मेहता, सचिव डॉ. अजीत सहगल, डॉ. विपिन कुमार, डॉ. हेमा सिंह, डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अंत में कलाकारों को सम्मानित किया गया।


