काशी की सांस्कृतिक विभूतियों को समर्पित ‘मुखड़ा–3’ चित्रकला कार्यशाला का शुभारंभ

नागरी नाटक मंडली न्यास एवं अभ्युदय संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय चित्रकला कार्यशाला ‘मुखड़ा–3’ का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य काशी की सांस्कृतिक, साहित्यिक, संगीत एवं नाट्य परंपरा से जुड़े उन विशिष्ट व्यक्तित्वों को चित्रकला के माध्यम से पुनः जनस्मृति में स्थापित करना है, जिनका योगदान समय के साथ विस्मृत होता जा रहा है।कार्यशाला के उद्घाटन के साथ ही कलाकारों ने काशी की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े महान विभूतियों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित चित्रों का सृजन प्रारंभ किया। आयोजन में शामिल कलाकारों ने काशी की गौरवशाली परंपरा, कला, साहित्य, संगीत और रंगमंच से जुड़े पुरोधाओं को अपनी कूंची के माध्यम से जीवंत करने का प्रयास किया।

आयोजकों ने बताया कि काशी सदियों से ज्ञान, कला, साहित्य, संगीत और अध्यात्म की राजधानी रही है। यहां जन्मे और कार्यरत रहे अनेक विद्वानों, संगीतज्ञों, रंगकर्मियों एवं लोककलाकारों ने देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाई, लेकिन समय के साथ उनकी स्मृतियां सीमित दायरे में सिमटती जा रही हैं। ‘मुखड़ा–3’ इसी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।कार्यशाला के दौरान तैयार होने वाली कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिससे आमजन काशी की सांस्कृतिक धरोहर और उसके निर्माताओं से परिचित हो सकें।कार्यक्रम की संयोजक डॉ. शारदा सिंह ने कहा कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की स्मृतियों को संरक्षित रखने का सशक्त साधन भी है। उन्होंने कहा कि ‘मुखड़ा–3’ के माध्यम से काशी की विलुप्त होती सांस्कृतिक स्मृतियों को सहेजने और उनके प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।कार्यशाला में शहर के अनेक कलाकार, कला-प्रेमी एवं सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे।




Post a Comment

Previous Post Next Post