यूपी विधानसभा के आगामी मॉनसून सत्र से पहले प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बड़ा हमला बोला है। राजभर ने दावा किया कि सपा के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और पार्टी में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए राजभर ने अखिलेश यादव के मुंबई दौरों पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि अखिलेश बाबू बार-बार छुप-छुपकर मुंबई क्यों जा रहे हैं, जबकि वहां सपा के केवल दो विधायक हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर वहां कोई टूट भी होती है तो उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन उत्तर प्रदेश में जो नेता और विधायक पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं, उनकी चिंता कौन करेगा।
राजभर ने आगे दावा किया कि मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले सपा अपने सांसदों और नेताओं को कर्नाटक के एक रिसॉर्ट में ले जाने की योजना बना रही है, लेकिन यह योजना सफल नहीं हो पाएगी। उन्होंने कहा कि सपा में गड़बड़ी को लेकर जो बातें वह पहले से कह रहे हैं, अब उसके प्रमाण सामने आने लगे हैं और मामला केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं है बल्कि स्थिति उससे कहीं आगे बढ़ चुकी है।इससे पहले भी राजभर ने सपा में संभावित टूट का दावा करते हुए कहा था कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि पार्टी की मौजूदा स्थिति जारी रही तो अंततः उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी शिवपाल सिंह यादव को संभालनी पड़ सकती है, क्योंकि वही संगठन को दोबारा मजबूत करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने सपा की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पार्टी से कई वर्गों के लोग दूरी बना रहे हैं।राजभर ने सपा के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि रामगोपाल यादव ने उनके और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। राजभर का कहना है कि सपा में आंतरिक विवाद लगातार बढ़ रहे हैं और इसका असर पार्टी के संगठन पर दिखाई दे रहा है।
हालांकि सपा ने राजभर के आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया है। सलेमपुर से सपा सांसद रमाशंकर राजभर ने पलटवार करते हुए कहा कि सुभासपा के पास केवल चार विधायक हैं और यदि समाजवादी पार्टी अपने दरवाजे खोल दे तो सुभासपा के कई नेता और विधायक सपा में शामिल होने के लिए तैयार हो जाएंगे। उन्होंने राजभर के दावों को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया।मॉनसून सत्र से पहले सपा और सुभासपा के बीच चल रही यह जुबानी जंग प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राजभर के दावों पर समाजवादी पार्टी की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।


