418 वर्ष पुराना ऐतिहासिक दुलदुल का जुलूस निकला, 42 घंटे तक चलेगा मातमी कारवां

मोहर्रम की चांद की छठी तारीख के अवसर पर कच्ची सराय, दालमंडी स्थित वक्फ इमामबाड़े से 418 वर्ष पुराना ऐतिहासिक एवं कदीमी दुलदुल का जुलूस निकाला गया। विश्व का एकमात्र बताया जाने वाला यह जुलूस लगभग 40 से 42 घंटे तक लगातार चलता है और विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरते हुए तीसरे दिन इमामबाड़े पहुंचकर संपन्न होगा।मरहूम सैयद इकबाल हुसैन की परंपरा के तहत निकाले जा रहे इस जुलूस की व्यवस्था में जफर हसन एवं सागर हसन का विशेष सहयोग रहा। 

जुलूस में अंजुमन जवादिया बनारस द्वारा नोहाख्वानी और मातम किया गया। जुलूस में वाराणसी की कई बैंड पार्टियां एवं शहनाई वादक मातमी धुनें बजाते हुए शामिल हैं। इसके साथ बड़ी संख्या में ऊंटों का काफिला भी चल रहा है। जुलूस के संचालक शकील अहमद जादूगर ने बताया कि ऊंटों का यह काफिला उस ऐतिहासिक घटना का प्रतीक है, जब 1400 वर्ष पूर्व हजरत इमाम हुसैन का परिवार मदीना से कर्बला पहुंचा था।उन्होंने बताया कि जुलूस थाना चौक की देखरेख में निकाला जाता है तथा यह थाना चौक, दशाश्वमेध, लक्सा, चेतगंज, सिगरा, जैतपुरा, आदमपुर और कोतवाली थाना क्षेत्रों से होकर गुजरता है।






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