अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता लगभग अंतिम रूप ले चुका है। ट्रम्प के मुताबिक, इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे।न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया है कि ट्रम्प, जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पहले ही डिजिटल रूप से समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। हालांकि, समझौते का पूरा मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। ट्रम्प ने कहा है कि दस्तावेज को औपचारिक हस्ताक्षर के बाद जारी किया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 14 बिंदुओं वाला एक प्रारंभिक मसौदा तैयार किया गया है, जिस पर आगे तकनीकी स्तर की बातचीत होगी। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि समझौते के तहत ईरान को आर्थिक सहायता के रूप में बड़ा पैकेज मिल सकता है। हालांकि, करीब 28 लाख करोड़ रुपए की संभावित सहायता को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और युद्ध की आशंकाओं को खत्म करने के उद्देश्य से तैयार किए गए इस समझौते को लेकर ट्रम्प प्रशासन के भीतर भी मतभेद सामने आए हैं। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, CIA प्रमुख जॉन रैटक्लिफ को संदेह है कि ईरान समझौते में किए गए सभी वादों का पालन करेगा या नहीं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी आशंका जताई है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर वे कदम उठाने के लिए तैयार नहीं है, जिनकी अमेरिका अपेक्षा कर रहा है। वहीं रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी समझौते को लेकर चिंता व्यक्त की है। दूसरी ओर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस समझौते के पक्ष में बताए जा रहे हैं। उनका मानना है कि यह समझौता पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने और अमेरिका-ईरान संबंधों में नई शुरुआत का रास्ता खोल सकता है।


