कचहरी के संभावित विस्थापन को लेकर वाराणसी में अधिवक्ताओं के दो प्रमुख संगठनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। बनारस बार एसोसिएशन ने प्रेस वार्ता कर कचहरी विस्थापन की चर्चाओं को भ्रामक बताते हुए दावा किया कि इस संबंध में शासन अथवा मुख्यमंत्री कार्यालय से जिला प्रशासन को कोई आधिकारिक प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।महामंत्री सुधांशु मिश्रा ने बताया कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी में भी कचहरी विस्थापन संबंधी किसी प्रस्ताव की पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग निजी हितों और संभावित निर्माण कार्यों में लाभ की मंशा से इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं।बार पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान कचहरी परिसर में न्यायालय, कलेक्ट्रेट और विभिन्न न्यायिक फोरम एक ही स्थान पर होने से वादकारियों और अधिवक्ताओं को सुविधा मिलती है। उन्होंने अहमदाबाद और देहरादून की तर्ज पर मौजूदा परिसर में ही बहुमंजिला आधुनिक न्यायालय भवन विकसित करने की वकालत की।बनारस बार एसोसिएशन ने सेंट्रल बार एसोसिएशन द्वारा भेजे गए कथित प्रस्ताव पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने विस्थापन का विरोध किया था, लेकिन उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर प्रस्ताव भेजा गया।अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे कचहरी के आधुनिकीकरण और विस्तार के पक्षधर हैं, लेकिन उसके पूर्ण विस्थापन का हर स्तर पर विरोध करेंगे। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कचहरी को स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया तो व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।


