वाराणसी में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कैंट रेलवे स्टेशन से काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित विश्वनाथ मंदिर तक इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू कर दी गई है। पहले चरण में वाराणसी सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (VCTSL) की छह ई-बसों का संचालन इस रूट पर किया जा रहा है। नई सुविधा से विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, श्रद्धालुओं और आम यात्रियों को सीधे विश्वविद्यालय परिसर तक पहुंचने के लिए सुगम और सस्ती सार्वजनिक परिवहन सेवा उपलब्ध होगी।
वर्तमान में ई-बसें शहर के प्रमुख क्षेत्रों के अलावा पिंडरा, बाबतपुर, हरहुआ, मार्कंडेय महादेव धाम, पड़ाव, पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर और रामनगर तक संचालित हो रही हैं। शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए जल्द ही 250 नई इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल की जाएंगी। इनके संचालन के लिए वाराणसी-आजमगढ़ रोड स्थित मड़वा में चार्जिंग स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा परेड कोठी और सारनाथ में भी नए चार्जिंग स्टेशनों को मंजूरी मिल चुकी है। VCTSL के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक एके सिंह के अनुसार, तीन ई-बसें कैंट स्टेशन से सिगरा, भेलूपुर और लंका होते हुए BHU विश्वनाथ मंदिर तक जाएंगी।
वहीं तीन अन्य बसें कैंट, लहरतारा, बरेका, सुंदरपुर और लंका मार्ग से संचालित की जाएंगी। विशेष बात यह है कि BHU विश्वनाथ मंदिर तक रूट बढ़ाए जाने के बावजूद यात्रियों को अतिरिक्त किराया नहीं देना होगा। कैंट स्टेशन से लंका तक पहले की तरह 20 रुपए प्रति यात्री किराया ही लिया जाएगा और इसी किराए में यात्री विश्वनाथ मंदिर तक यात्रा कर सकेंगे। वहीं, लहरतारा-सुंदरपुर मार्ग से कैंट से लंका तक जाने वाली बसों का किराया 25 रुपए प्रति यात्री निर्धारित किया गया है। जबकि लंका चौराहा या सिंहद्वार से विश्वनाथ मंदिर तक यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए 10 रुपए प्रति यात्री किराया तय किया गया है। BHU परिसर में ई-बस सेवा शुरू होने से विश्वविद्यालय से जुड़े हजारों विद्यार्थियों और कर्मचारियों के साथ-साथ दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही निजी वाहनों पर निर्भरता कम होने से शहर में हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।


