लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मानसून की रफ्तार भले ही धीमी पड़ गई हो, लेकिन पहाड़ों पर लगातार हो रही भारी बारिश का असर प्रदेश की नदियों पर साफ दिखाई दे रहा है। गंगा, घाघरा-सरयू समेत 10 नदियां उफान पर हैं, जिससे कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।
लखीमपुर खीरी में गुरुवार शाम शारदा नदी में एक नाव पलट गई। नाव में सवार 9 लोग नदी में बह गए, जिनमें से 7 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि 2 लोग अब भी लापता हैं। उनकी तलाश के लिए राहत एवं बचाव अभियान जारी है।बिजनौर में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से बहसूमा-ठाकुरद्वारा स्टेट हाईवे पर पानी बहने लगा है। लोग और वाहन जोखिम उठाकर पानी के बीच से गुजर रहे हैं। रायपुर खादर और मीरापुर सीकरी गांवों में सैकड़ों बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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शुक्रवार सुबह से लखनऊ, गोरखपुर समेत 35 शहरों में बादल छाए रहे और ठंडी हवाएं चलती रहीं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने प्रदेश के 24 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। ललितपुर, मिर्जापुर और सोनभद्र में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है।मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब ओडिशा और छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ गया है। इसके कारण उत्तर प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में प्रदेश के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से से मानसूनी बादल हटते हुए दिखाई दे रहे हैं।
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इससे पहले गुरुवार को वाराणसी, मेरठ और बिजनौर समेत 29 शहरों में बारिश दर्ज की गई। बिजनौर में कई सड़कें जलमग्न हो गईं, जबकि बेसिक शिक्षा अधिकारी और आवास विकास विभाग के कार्यालयों में भी पानी भर गया। मेरठ में गंगा किनारे लगा एक बिजली का टावर तेज बहाव में बह गया।
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