लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड की जांच अब बड़े प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गई है। इस मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने वर्ष 2016 से 2024 के बीच लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे अधिकारियों का पूरा ब्योरा मांगा था। इसके बाद एलडीए ने नगर आयुक्त गौरव कुमार समेत 9 आईएएस और 9 पीसीएस अधिकारियों के नाम एसआईटी को सौंप दिए हैं। सूची में नगर आयुक्त गौरव कुमार, पूर्व उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी, शिवाकांत द्विवेदी, एमपी सिंह, पवन गंगवार, रितु सुहास, सत्येंद्र सिंह यादव और श्रीशचंद्र वर्मा समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें से कुछ अधिकारी वर्तमान में अलग-अलग जिलों में जिलाधिकारी (डीएम) के पद पर तैनात हैं, जबकि कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
एसआईटी यह जांच कर रही है कि जिस भवन में आग लगी, उसके निर्माण, मानचित्र स्वीकृति, निरीक्षण और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के दौरान किस स्तर पर लापरवाही हुई। जांच में यह भी देखा जाएगा कि संबंधित अधिकारियों ने समय रहते आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की। मामले में वर्तमान में एलडीए में तैनात पीसीएस अधिकारियों विपिन शिवहरे, प्रभाकर सिंह, संगीता राघव और सुशील प्रताप सिंह के अलावा पूर्व अधिकारियों अमित राठौर, श्रद्धा चौधरी, प्रिया सिंह, डीके सिंह और वीबी मिश्रा के नाम भी जांच के लिए भेजे गए हैं। इसके साथ ही प्राधिकरण सेवा और स्थानीय निकाय सेवा के कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी एसआईटी को उपलब्ध कराए गए हैं।
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जांच का दायरा केवल आईएएस और पीसीएस अधिकारियों तक सीमित नहीं है। एसआईटी 52 जूनियर इंजीनियरों और सहायक अभियंताओं के साथ-साथ 14 अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी। उनकी तैनाती अवधि, फाइलों पर की गई टिप्पणियों और कार्रवाई के रिकॉर्ड का परीक्षण किया जाएगा।
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अधिकारियों के नाम सामने आने के बाद एलडीए और प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस बार जांच का दायरा निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित न रहकर शीर्ष अधिकारियों तक पहुंच गया है, जिससे जिम्मेदारी तय होने की संभावना बढ़ गई है।वहीं, नगर आयुक्त गौरव कुमार ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी है। उनका कहना है कि एलडीए में उन्होंने केवल 11 दिन ही कार्य किया था, जबकि उत्तरदायित्व तय करने के लिए कम से कम 90 दिन का कार्यकाल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भी एसआईटी उनका पक्ष मांगेगी, वे अपना जवाब प्रस्तुत करेंगे।
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