प्रयागराज/लखनऊ। 900 करोड़ रुपये के कथित कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायाधीश को प्रभावित करने की कोशिश पर कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस कृष्ण पहल ने कहा कि किसी भी लंबित मामले में न्यायाधीश तक पहुंचने या उन्हें प्रभावित करने का प्रयास न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। इसे न्यायालय के इतिहास का "काला दिन" बताते हुए उन्होंने 76 जमानत याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया और सभी मामलों को नई पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया। अब इन मामलों की सुनवाई 7 अगस्त 2026 को होगी।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि न्याय व्यवस्था की नींव निष्पक्ष और निर्भीक न्याय पर टिकी है। यदि कोई पक्षकार या उससे जुड़ा व्यक्ति न्यायाधीश से निजी संपर्क स्थापित करने की कोशिश करता है तो इससे न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता पर सवाल उठता है और किसी भी फैसले पर संदेह पैदा हो सकता है।
![]() |
| Advertisement |
वहीं, इस बहुचर्चित कोडीन कांड की जांच में अब तक 37 जिलों से 371 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 167 फर्मों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। जांच एजेंसियों के अनुसार अवैध कारोबार से 834 करोड़ रुपये जुटाने के प्रमाण मिले हैं, जबकि करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं। मुख्य आरोपियों में भोला प्रसाद जायसवाल, विशाल सिंह, विभोर राणा, अमित सिंह टाटा और बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
![]() |
| Advertisement |
जांच में यह भी सामने आया कि अगस्त 2025 में यूपी और बिहार के रास्ते बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी की जाती थी। इस मामले में दुबई में छिपे मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी है, लेकिन उसका प्रत्यर्पण अब तक नहीं हो सका है। दूसरी ओर, विपक्षी दल और कई सामाजिक संगठन आरोप लगा रहे हैं कि मामले में कथित रूप से जुड़े कुछ प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों पर अब तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है।
![]() |
| Advertisement |



