IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्या मामला: ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद, अदालत ने सुनाया बड़ा फैसला

नई दिल्ली। वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में दिल्ली की अदालत ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने माना कि ताहिर हुसैन हथियारों से लैस हिंसक भीड़ का हिस्सा था, जिसने सांप्रदायिक हिंसा के दौरान अंकित शर्मा की हत्या की। अदालत ने ताहिर हुसैन के अलावा जावेद, अनस, कासिम और नाजिम को भी दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इससे पहले 13 जुलाई को अदालत ने इन सभी को हत्या, अपहरण, दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा और विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने सहित कई धाराओं में दोषी ठहराया था। 

25 फरवरी 2020 को हुई थी हत्या

अभियोजन के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा ड्यूटी से घर लौटने के बाद दोबारा बाहर निकले, लेकिन वापस नहीं आए। परिजनों ने तलाश शुरू की तो अगले दिन उनका शव खजूरी खास नाले से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम में उनके शरीर पर 51 चोटों के निशान पाए गए, जिनमें कई गंभीर और धारदार हथियारों से किए गए घाव शामिल थे। 

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अभियोजन ने बताया था नृशंस हत्याकांड

सजा पर बहस के दौरान सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि अंकित शर्मा का अपहरण कर बेरहमी से पीटा गया और उनकी हत्या कर दी गई। अभियोजन ने कहा कि शरीर पर मिले घाव इस अपराध की क्रूरता को दर्शाते हैं और यह एक सुनियोजित तथा बेहद निर्मम हत्या थी। अभियोजन ने इसे "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" मामला बताते हुए दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। 

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जांच में मिले अहम सबूत

जांच के दौरान पुलिस ने ताहिर हुसैन के घर से बड़ी संख्या में ईंट-पत्थर, गुलेल और कांच की बोतलें बरामद की थीं। पुलिस का दावा था कि इनका इस्तेमाल दंगों के दौरान हिंसा फैलाने की तैयारी के लिए किया गया था। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि दंगे शुरू होने से पहले ताहिर ने अपने परिवार को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया था और उसके घर का इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों के केंद्र के रूप में किया गया। 

लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद फैसला

इस मामले में 2020 में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने चार्जशीट और कई पूरक आरोपपत्र दाखिल किए। मार्च 2023 में आरोप तय हुए, 13 जुलाई 2026 को पांच आरोपियों को दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 2026 को अदालत ने सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। 

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