3 जुलाई से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा के महज पांच दिन बाद ही पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग (बाबा बर्फानी) लगभग पिघल जाने से श्रद्धालुओं में निराशा है। 4 जुलाई से दर्शन शुरू हुए थे, लेकिन कई यात्रियों का कहना है कि अब शिवलिंग लगभग समाप्त हो चुका है और केवल उसका छोटा हिस्सा ही दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन है। हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ते तापमान, कम बर्फबारी और मौसम के बदलते स्वरूप का असर अमरनाथ गुफा में बनने वाले प्राकृतिक शिवलिंग पर पड़ रहा है। इसके अलावा गुफा के आसपास बढ़ती मानवीय गतिविधियां और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से भी स्थानीय तापमान प्रभावित हो रहा है, जिससे शिवलिंग तेजी से पिघल रहा है।
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रिपोर्टों के अनुसार, यात्रा के पहले चार दिनों में ही करीब 93 हजार श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके थे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से प्रशासन के सामने सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना भी चुनौती बन गया है। इसी वजह से प्रशासन ने प्रतिदिन सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को ही दर्शन कराने का फैसला किया है और बिना पंजीकरण यात्रा न करने की अपील की है।अमरनाथ यात्रा 57 दिनों तक चलनी है, लेकिन शिवलिंग के इतनी जल्दी पिघल जाने से आने वाले दिनों में दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ गई है। जानकारों का कहना है कि पहले बाबा बर्फानी के दर्शन 40 से 45 दिनों तक होते थे, जबकि अब यह अवधि लगातार घटती जा रही है। वर्ष 2018 में शिवलिंग 29 दिन, 2020 में 38 दिन, 2022 में 28 दिन और 2024 में करीब एक सप्ताह तक ही बना रहा था।
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विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पिछले दो दशकों में अमरनाथ यात्रा मार्ग पर बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। गुफा के पास लंगर, बिजली, सोलर लाइट, सड़क और अन्य निर्माण कार्यों के साथ-साथ बढ़ती मानवीय गतिविधियों का असर भी वहां के प्राकृतिक वातावरण पर पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि जलवायु परिवर्तन की गति इसी तरह बनी रही तो आने वाले वर्षों में बाबा बर्फानी के प्राकृतिक शिवलिंग के बनने और लंबे समय तक बने रहने की अवधि और कम हो सकती है।
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