वाराणसी की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार की कैबिनेट ने करीब ₹25,445.96 करोड़ की लागत वाली दो बड़ी एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के तहत शहर में कुल 89.26 किलोमीटर लंबे दो एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इनके निर्माण से ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और कई प्रमुख मार्गों पर यात्रा का समय 60 मिनट से घटकर करीब 20 मिनट रह जाएगा।
पहली परियोजना के तहत वरुणा नदी के किनारे 43.218 किलोमीटर लंबा 6/4 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। यह परियोजना हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) पर बनेगी, जिसकी अनुमानित लागत ₹10,998.32 करोड़ है। इसके बनने से राष्ट्रीय राजमार्ग-31 (NH-31) और काशी रेलवे स्टेशन के बीच तेज और सुगम संपर्क स्थापित होगा। मौजूदा समय में लगभग 40 मिनट का सफर घटकर करीब 20 मिनट में पूरा हो सकेगा। साथ ही चंदौली के सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र, एक सोशल नोड और छह प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब तक पहुंच भी बेहतर होगी।
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दूसरी परियोजना के तहत NH-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच 46.039 किलोमीटर लंबा छह लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस परियोजना पर ₹14,447.64 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसके पूरा होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग-19 और रिंग रोड के बीच निर्बाध संपर्क मिलेगा, जिससे शहर के मौजूदा सड़क नेटवर्क पर दबाव कम होगा और यातायात अधिक सुचारु बनेगा।
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इस कॉरिडोर को गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा, जो गंगा नदी के समानांतर बनेगा। इसके जरिए अस्सी घाट, मणिकर्णिका घाट, नमो घाट और काशी विश्वनाथ धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी। परियोजना में गंगा और घाटों के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसमें केबल-स्टेड ब्रिज, पर्यटकों के लिए व्यूपॉइंट, दर्शक गैलरी और गंगा पार करने के लिए तीन पैदल झूला पुल बनाने की भी योजना शामिल है।
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सरकार का मानना है कि दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद वाराणसी में ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी, शहर और बाहरी क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी तथा पर्यटन, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे श्रद्धालुओं, पर्यटकों, छात्रों और स्थानीय नागरिकों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।

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