मणिपुर में मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा तीन साल बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। राज्य के इंफाल घाटी में रहने वाले मेइती समुदाय और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी-जो (कुकी) समुदाय के बीच शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 60 हजार से ज्यादा लोग अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए हैं।
हिंसा की शुरुआत उस समय हुई थी, जब मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग को लेकर विवाद बढ़ गया। इसके विरोध में निकाली गई रैली के बाद दोनों समुदायों के बीच झड़पें भड़क उठीं, जो देखते ही देखते पूरे राज्य में फैल गईं। इसके बाद कई घरों, धार्मिक स्थलों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा तथा हजारों लोग विस्थापित हो गए।
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हालांकि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है और शांति बहाल करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन राज्य के कई संवेदनशील इलाकों में अब भी तनाव बना हुआ है। समय-समय पर छिटपुट हिंसा की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाया है।
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