राम मंदिर चढ़ावा मामले पर चिराग पासवान का विपक्ष को संदेश, बोले- राजनीति नहीं, जांच में सहयोग करें

अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा हेराफेरी मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्ष को राजनीति से बचने और जांच में सहयोग करने की सलाह दी है। हरिद्वार दौरे पर पहुंचे चिराग पासवान ने कहा कि यह मामला करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़ा है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और देशवासियों की आस्था के अनुरूप अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कराया है। ऐसे में यदि मंदिर के चढ़ावे में किसी तरह की हेराफेरी या भ्रष्टाचार हुआ है, तो यह बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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चिराग पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा" के संकल्प के अनुरूप सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में कोई अधिकारी, कर्मचारी, ट्रस्ट से जुड़ा व्यक्ति या कोई अन्य जिम्मेदार व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। धर्मस्थलों से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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उन्होंने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय जांच एजेंसियों का सहयोग किया जाना चाहिए। यदि किसी के पास इस मामले से जुड़े कोई दस्तावेज, तथ्य या साक्ष्य हैं, तो उन्हें एसआईटी या संबंधित जांच एजेंसी को उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके और सच्चाई सामने आए। उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े मामलों में राजनीति नहीं, बल्कि दोषियों को बेनकाब करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

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वहीं, कांग्रेस सांसद और राज्यसभा में पार्टी के उपनेता प्रमोद तिवारी ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य चोरी का मामला नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के करोड़ों रुपये के चढ़ावे से जुड़ी कथित संगठित वित्तीय गड़बड़ी है। उन्होंने पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि चोरी के बाद रकम को अलग-अलग खातों में जमा कर कथित रूप से वैध बनाने की कोशिश की गई।राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर सरकार निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिला रही है, वहीं विपक्ष स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आने वाली रिपोर्ट पर टिकी है।

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