आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. सुनील कुमार ने वर्तमान समय को 'आदित्य युग' बताते हुए कहा कि भगवान कल्कि की आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से मानव चेतना के जागरण का कार्य चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि सनातन समाज के विभिन्न वर्गों के लिए अलग-अलग आध्यात्मिक मार्ग निर्धारित हैं और इस व्यवस्था को लेकर समाज में भ्रम फैलाया जा रहा है।
प्रेस वार्ता में उन्होंने भगवान राम और भगवान कृष्ण से जुड़ी परंपराओं, गुरु पूर्णिमा के महत्व, धार्मिक व्यवस्थाओं तथा वर्तमान आध्यात्मिक नेतृत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि समाज को मूल सनातन व्यवस्था के अनुरूप आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
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डॉ. सुनील कुमार ने इस दौरान धार्मिक परंपराओं और पूजा-पद्धति से जुड़े कई विषयों पर अपने सुझाव भी दिए। उन्होंने तुलसी के सेवन, वृंदावन यात्रा, जपमाला के उपयोग, भगवान शिव की पूजा तथा ब्रह्मा-सरस्वती से जुड़े धार्मिक प्रसंगों पर अपने व्यक्तिगत विचार रखते हुए सनातन समाज से इन विषयों पर पुनर्विचार करने की अपील की।
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