उत्तर प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल हैं। एक्सप्रेसवे पर मवेशियों और अन्य जानवरों की आवाजाही रोकने के लिए बनाई गई सुरक्षा चारदीवारी संचालन शुरू होने के कुछ ही महीनों बाद कई स्थानों पर ध्वस्त हो गई है। इस घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन इसी साल अप्रैल में किया गया था और इसे उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी आधारभूत परियोजनाओं में गिना जाता है। लेकिन पहली ही बारिश के मौसम में एक्सप्रेसवे से जुड़े कई हिस्सों में क्षति की खबरें सामने आने लगी हैं। हाल ही में उन्नाव में एक्सप्रेसवे से जुड़ी लिंक रोड का एक हिस्सा भी बारिश के बाद धंस गया था, जिसके बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर बहस तेज हो गई।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुरक्षा चारदीवारी और अन्य संरचनाओं के निर्माण में मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत और जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में एक्सप्रेसवे पर आवारा पशुओं की आवाजाही बढ़ सकती है, जिससे सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ेगा।
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इस मामले को लेकर विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा है और पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं संबंधित एजेंसियों की ओर से क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का काम शुरू किए जाने की बात कही जा रही है। फिलहाल निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
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