पूर्व प्रधानमंत्री एवं जननायक चंद्रशेखर की जन्म शताब्दी और 19वीं पुण्यतिथि के अवसर पर "राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, चंद्रशेखर और भारत का लोकतांत्रिक भविष्य" विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र, समाजवाद, वैचारिक राजनीति और जन आंदोलनों की उस विरासत पर मंथन करना था, जिसे महात्मा गांधी और चंद्रशेखर ने अपने जीवन, संघर्ष और विचारों से समृद्ध किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कर्नाटक सरकार के पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक बी. आर. पाटिल ने कहा कि जननायक चंद्रशेखर केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, वैचारिक स्पष्टता और जनपक्षधर राजनीति के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि आज जब लोकतंत्र अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब उनके विचार नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं।
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संगोष्ठी के संयोजक कुंवर सुरेश सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी और चंद्रशेखर की राजनीति सत्ता प्राप्ति की नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सम्मान और सहभागिता सुनिश्चित करने की थी। उन्होंने लोकतांत्रिक भविष्य को मजबूत बनाने के लिए संवाद, असहमति के सम्मान, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया।
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विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन ने लोकतंत्र, मीडिया और जनमत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनावों से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों, स्वतंत्र मीडिया और वैचारिक प्रतिबद्धता से सुनिश्चित होती है।चंद्रशेखर समाजवादी न्यास के तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवियों, समाजवादियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता की। वक्ताओं ने जननायक चंद्रशेखर के विचारों को वर्तमान समय में भी अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए उन्हें नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
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