महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार को उस समय हलचल मच गई, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार विधानसभा परिसर में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आधिकारिक कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी पार्टी के विधायकों से बैठक की। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या एनसीपी (एसपी) सत्तारूढ़ महायुति या एनडीए के करीब आ रही है।
हालांकि, एनसीपी (एसपी) और शिंदे गुट दोनों ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने बताया कि शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक में शामिल होने विधानसभा पहुंचे थे। बैठक के बाद पार्टी विधायक उनसे मिलना चाहते थे, लेकिन उनकी उम्र को देखते हुए लंबी दूरी तक पैदल चलना उचित नहीं था। इसलिए निकास द्वार के पास स्थित उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय को बैठक के लिए चुना गया।
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जयंत पाटिल ने यह भी स्पष्ट किया कि जब शरद पवार वहां पहुंचे, उस समय एकनाथ शिंदे अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे। बाद में जानकारी मिलने पर शिंदे वहां पहुंचे और उन्होंने शरद पवार का शॉल और बुके देकर स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच करीब 10 मिनट तक शिष्टाचार मुलाकात हुई।उपमुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में भी इसे केवल शिष्टाचार भेंट बताया गया। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री उदय सामंत ने कहा कि शरद पवार देश के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और उनका सम्मान करना महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा है।
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वहीं, एनसीपी (एसपी) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने एनडीए में शामिल होने या पार्टी के विलय की सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि शरद पवार केवल विधानसभा सत्र के दौरान अपने विधायकों, सांसदों और पार्टी नेताओं से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए में शामिल होने या किसी नए राजनीतिक समीकरण की चर्चा पूरी तरह निराधार और अफवाह है।
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