बांग्लादेश में 81 फीट ऊंची भगवान राम की प्रस्तावित मूर्ति का निर्माण करा रहे हिंदू युवक हरिदास चंद्र तारनी दास की गिरफ्तारी के बाद देश में विवाद गहरा गया है। शनिवार को ढाका के नेशनल प्रेस क्लब के बाहर हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और सरकार पर धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मूर्ति निर्माण रुकवाने के लिए हरिदास को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे मामले में फंसाया गया है।
गायकबंधा जिले के पलाशबाड़ी क्षेत्र में श्री श्री राधा गोविंद काली मंदिर परिसर में 81 फीट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा बनाने की योजना चल रही थी। इसी दौरान बांग्लादेश के आपराधिक जांच विभाग (CID) ने हरिदास को 9.35 करोड़ टका के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अधिकारियों का दावा है कि मामले की जांच वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर की जा रही है।
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गिरफ्तारी के विरोध में बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में परिषद के नेताओं ने हरिदास की तत्काल रिहाई की मांग की। उनका आरोप है कि सरकार ने धार्मिक परियोजना को रोकने के उद्देश्य से कार्रवाई की है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि हरिदास को जल्द रिहा नहीं किया गया तो देशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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प्रदर्शन के दौरान परिषद के नेताओं ने दावा किया कि पिछले एक वर्ष में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हजारों हमले हुए हैं और कई मंदिरों को भी निशाना बनाया गया है। उन्होंने सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस बीच भारत ने भी हाल के महीनों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और धार्मिक स्थलों पर हमलों को लेकर चिंता जताई है। भारत ने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कट्टरपंथी तत्वों पर सख्त कार्रवाई करने की अपील की है।
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