श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में शिक्षा मंत्री सकीना इटू पर टिप्पणी करने वाले 12 वर्षीय छात्र का वायरल वीडियो अब कानूनी जांच के दायरे में आ गया है। श्रीनगर की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए वीडियो हटाने, एफआईआर दर्ज करने और इसे सबसे पहले प्रसारित करने वाले न्यूज पोर्टल के प्रतिनिधियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
समिति का कहना है कि नाबालिग का इंटरव्यू उसके अभिभावकों की सहमति और स्कूल प्रशासन की अनुमति के बिना रिकॉर्ड कर सार्वजनिक किया गया। प्रथम दृष्टया इसे किशोर न्याय अधिनियम और बच्चों की निजता से जुड़े प्रावधानों के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है। इस संबंध में संबंधित पक्षों से जवाब भी तलब किया गया है।
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यह मामला उस समय सामने आया, जब सोशल मीडिया पर एक 12 वर्षीय छात्र का वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में छात्र भीषण गर्मी के बीच स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित न किए जाने पर शिक्षा मंत्री सकीना इटू की आलोचना करता दिखाई दिया था। वीडियो वायरल होने के बाद इस पर सोशल मीडिया और विभिन्न वर्गों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
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मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कश्मीर के प्रमुख धार्मिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने भी बच्चों को सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनाए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, निजता और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस तरह के मामलों में विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।सीडब्ल्यूसी ने कहा कि वीडियो के वायरल होने से बच्चे की पहचान सार्वजनिक हो गई, जिससे उसके भविष्य और व्यक्तिगत जीवन पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से समिति ने बच्चों के इंटरव्यू और उनकी तस्वीर या वीडियो प्रसारित करने को लेकर नई एडवाइजरी भी जारी की है। इस बीच जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बाद में 6 जुलाई से 19 जुलाई तक स्कूलों के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया।
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