पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में दर्ज एक एफआईआर को रद्द करते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति की भावनाएं आहत होने से आपराधिक अपराध नहीं बन जाता। अदालत ने माना कि मामले में दुर्भावनापूर्ण मंशा का कोई प्रमाण नहीं मिला।
यह मामला जन्माष्टमी के दौरान एक महिला द्वारा अपने पालतू कुत्ते को भगवान श्रीकृष्ण की वेशभूषा पहनाकर उसकी तस्वीर व्हाट्सएप स्टेटस पर साझा करने से जुड़ा था। इस पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
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सुनवाई के दौरान महिला ने अदालत को बताया कि उसकी कोई संतान नहीं है और वह अपने पालतू कुत्ते को अपने बच्चे की तरह रखती है। जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धा और प्रेम के भाव से उसने उसे भगवान कृष्ण का स्वरूप दिया था। उसका उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 298 तभी लागू होती है, जब किसी पवित्र स्थल, धार्मिक प्रतीक या पूजनीय वस्तु को जानबूझकर अपमानित या अपवित्र करने की मंशा साबित हो। चूंकि इस मामले में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, इसलिए एफआईआर और उससे संबंधित सभी कानूनी कार्यवाही को निरस्त कर दिया गया।
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