इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायतों की जनसंख्या निर्धारित करने को लेकर अहम निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायतों की आबादी तय करने के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को ही आधार माना जाएगा।
कोर्ट के इस फैसले का असर ग्राम पंचायतों के गठन, पुनर्गठन और सीमा निर्धारण की प्रक्रिया पर पड़ेगा। अदालत ने कहा कि जनसंख्या से जुड़े मामलों में आधिकारिक और प्रमाणित आंकड़ों का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
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उत्तर प्रदेश में अभी तक अंतिम पूर्ण जनगणना 2011 में हुई थी। ऐसे में पंचायतों की आबादी के निर्धारण के लिए इसी जनगणना के आंकड़े प्रासंगिक माने जाएंगे। हाईकोर्ट ने इस संबंध में स्पष्टता देते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को निर्धारित आधार के अनुसार ही प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
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अदालत के फैसले से ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और सीमांकन को लेकर चल रही प्रक्रिया में भी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। फैसले को पंचायत स्तर पर जनसंख्या निर्धारण में एकरूपता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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