वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र और प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल होने के कारण वाराणसी में भीड़ और यातायात का दबाव लगातार बना रहता है। शहर के कई प्रमुख चौराहों पर शाम के समय जाम की स्थिति आम हो गई है। चितईपुर, भिखारीपुर, डीएलडब्ल्यू-ककरमत्ता, लंका और मंडुआडीह जैसे प्रमुख चौराहों पर अक्सर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं।
ऐसे में सड़क किनारे बनी पैदल पटरी राहगीरों के लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। जाम के दौरान लोग सड़क पर वाहनों के बीच चलने के बजाय इसी पटरी का इस्तेमाल कर सुरक्षित तरीके से अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं।
लेकिन डीएलडब्ल्यू-ककरमत्ता चौराहे के पास स्थित St. Johns DLW School के सामने पैदल राहगीरों के लिए बनी पटरी को कथित तौर पर बैरियर लगाकर रोकने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि स्कूल का एक रास्ता BLW कैंपस की ओर और दूसरा ककरमत्ता गेट यानी डीएलडब्ल्यू-चितईपुर मार्ग की ओर खुलता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक शनिवार की शाम करीब 5:45 से 6:15 बजे के बीच सड़क पर काफी जाम था। जाम से बचने के लिए जब कुछ लोग सड़क किनारे बनी पटरी से पैदल निकलने लगे , मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, उन्होंने देखा कि दो लोगों ने सड़क किनारे बनी पैदल पटरी पर बैरियर लगाया और इसके बाद कैंपस के अंदर चले गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दोनों लोग स्कूल के गार्ड प्रतीत हो रहे थे। हालांकि, इस संबंध में स्कूल प्रबंधन की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पूरे मामले को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं—आखिर पैदल चलने के लिए बनाई गई पटरी को किसके आदेश पर रोका गया? क्या स्कूल को सार्वजनिक रास्ते पर इस तरह बैरियर लगाने की अनुमति है? और जाम के समय राहगीरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
लोगों का कहना है कि यदि सड़क किनारे खड़ी किसी बाइक या वाहन पर यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए कार्रवाई और चालान किया जाता है, तो सार्वजनिक रास्ते को अवरुद्ध करने पर भी नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।
अब देखना होगा कि क्या संबंधित विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर जांच करेगा और रास्ता रोकने के आरोप पर स्कूल प्रशासन के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी, या फिर मामला प्रभाव और पहुंच के चलते ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
नोट: स्कूल प्रबंधन का पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है। उनका पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
अशुतोष की रिपोर्ट
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