दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले के अहम हिस्से सामने आने के बाद बृजभूषण शरण सिंह से जुड़े मामले में कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं। अदालत ने महिला पहलवानों की शिकायतों और गवाहियों में कथित विरोधाभास को आरोप साबित न होने का अहम आधार माना। कोर्ट के मुताबिक, कुछ शिकायतकर्ताओं ने कथित घटनाओं की जगह, देश और साल के बारे में शुरुआती बयानों में अलग जानकारी दी, जबकि बाद में उनके बयानों में बदलाव दिखाई दिया।
अदालत ने कहा कि घटना के स्थान और समय को लेकर इस तरह के विरोधाभास अभियोजन के मामले की विश्वसनीयता पर असर डालते हैं। अदालत ने यह भी माना कि कुछ शिकायतकर्ताओं के बाद के व्यवहार और बयानों को अभियोजन की कहानी के अनुरूप नहीं पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, दो शिकायतकर्ताओं ने अदालत में अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं किया।
![]() |
| Advertisement |
फैसले में अदालत ने आरोपों को लेकर बेहद गंभीर टिप्पणियां कीं और उन्हें झूठा, मनगढ़ंत तथा राजनीतिक साजिश से जुड़ा हुआ बताया। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपों में बार-बार एक जैसी बातें दोहराए जाने और कृत्रिमता के संकेत दिखाई दिए।
![]() |
| Advertisement |
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट का निष्कर्ष था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को आवश्यक कानूनी मानक के मुताबिक साबित नहीं कर सका। यह मामला 2023 में महिला पहलवानों के आरोपों और उनके विरोध प्रदर्शन के बाद देशभर में चर्चा में आया था। अब अदालत के फैसले में की गई टिप्पणियों के सामने आने के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।
![]() |
| Advertisement |



