वाराणसी में गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। शनिवार को नदी का जलस्तर 69.04 मीटर पहुंच गया। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक गंगा करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है। गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। ऐसे में नदी चेतावनी बिंदु से करीब 1.22 मीटर नीचे है। जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों के साथ किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।गंगा का पानी अब शीतला माता मंदिर तक पहुंच गया है।

रत्नेश्वर महादेव मंदिर करीब 80 प्रतिशत तक पानी में डूब चुका है। अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस का मंच पूरी तरह जलमग्न हो गया है। वहीं दशाश्वमेध घाट पर पानी जल पुलिस चौकी की दहलीज तक पहुंच गया है। घाटों पर बढ़ते पानी को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं। राजस्व विभाग के कर्मचारी जलस्तर पर नजर रखे हुए हैं। एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें लोगों को सावधानी बरतने की अपील कर रही हैं।27 अगस्त तक तेज बारिश के आसार कममौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव के अनुसार मानसून द्रोणिका का पश्चिमी छोर सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक गया है। इसके चलते फिलहाल वाराणसी में तेज बारिश की संभावना कम है।  |
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27 अगस्त तक भारी बारिश के आसार नहीं हैं। हालांकि बादलों की आवाजाही जारी रह सकती है और कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी हो सकती है।शनिवार सुबह शहर का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा करीब छह किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली, जबकि आर्द्रता 70 प्रतिशत रही। उमस के बीच आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रही।वरुणा किनारे निचले इलाकों में पहुंचा पानीगंगा के साथ वरुणा नदी के किनारे बसे निचले इलाकों में भी बाढ़ का असर दिखाई देने लगा है। सलारपुर नाला, चमेलिया बस्ती और डिपो कॉलोनी सलारपुर के निचले हिस्सों में कई घरों में पानी घुस गया है। |
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जलभराव बढ़ने के बाद कुछ परिवार ऊंचे इलाकों में किराए के मकान लेकर चले गए हैं। कुछ लोगों ने जरूरी सामान पहली मंजिल पर रख दिया और रिश्तेदारों के घर शिफ्ट हो गए।छोटी मस्जिद पुरानापुल क्षेत्र में नाले के रास्ते बाढ़ का पानी घरों की चौखट तक पहुंच गया है। करीब आधा दर्जन मकान पानी से घिर गए हैं। हालांकि दोपहर तक कोई परिवार सलारपुर के प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए राहत शिविर में नहीं पहुंचा था।चिरईगांव में खेतों में घुसा बाढ़ का पानीगंगा के बढ़ते जलस्तर का असर तटवर्ती कृषि क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है। |
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चिरईगांव ब्लॉक के ढाब क्षेत्र के निचले खेतों में पानी पहुंचने से सब्जियों की फसलें डूबने लगी हैं। इससे किसानों को फसल खराब होने की चिंता सताने लगी है।मोकलपुर के किसान लालबिहारी और श्यामबिहारी की दो बीघा से अधिक जमीन में लगी नेनुआ, करैला और कुनरू की फसल पानी में डूब गई। वहीं रामचंदीपुर नखवा के किसान परसू यादव की सवा बीघा जमीन में तैयार हरी मिर्च की नर्सरी भी बाढ़ की चपेट में आ गई है। किसानों का कहना है कि यदि पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहा तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगकटान से किसानों की बढ़ी चिंताबाढ़ के साथ तटवर्ती इलाकों में कटान का खतरा भी बढ़ गया है। कई स्थानों पर लगातार हो रहे कटाव के कारण कृषि भूमि का हिस्सा नदी में समाने लगा है। इससे किसानों के सामने फसल के साथ जमीन बचाने की भी चुनौती खड़ी हो गई है।बाढ़ और कटान की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। बीडीओ एवं ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिया सैनी ने शुक्रवार को बाढ़ चौकियों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई बेहतर रखने के निर्देश दिए। साथ ही फॉगिंग और ब्लीचिंग पाउडर का नियमित छिड़काव कराने को कहा, ताकि जलभराव के बाद संक्रमण और मच्छरों से होने वाली समस्याओं पर नियंत्रण किया जा सके।