कजरी तीज के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में काशी प्रबुद्ध महिला मंच की संस्थापिका अंजलि अग्रवाल ने लोकगीतों और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कजरी केवल एक लोकगीत नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और भावनाओं की पहचान है। इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
अंजलि अग्रवाल ने कहा कि बच्चों और युवाओं को कजरी, तीज-त्योहार और भारतीय लोक संस्कृति से परिचित कराने की जरूरत है। विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से कजरी गायन, लोकगीत और पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाना चाहिए, ताकि युवाओं में अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति रुचि बढ़े।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता के साथ आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन अपनी लोक परंपराओं को संरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कजरी जैसे लोकगीत हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं, जिन्हें केवल त्योहारों तक सीमित न रखकर नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाने का प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने अभिभावकों और युवाओं से भारतीय पर्व-त्योहारों एवं लोक परंपराओं से जुड़ने की अपील की, ताकि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके।



