जलभराव से बेहाल लखनऊ, कई इलाकों का संपर्क टूटा; लोग घरों में कैद

लखनऊ। शहर में भारी बारिश के बाद जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं और करीब 50 हजार की आबादी प्रभावित हुई। पानी घरों और सड़कों तक पहुंचने के कारण लोगों को बाहर निकलने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह वाहन पानी में फंस गए, जिससे यातायात भी प्रभावित रहा।आशियाना की एलडीए कॉलोनी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही। किला मोहम्मदी ड्रेन के उफनाने के कारण सेक्टर एल, एच और जी सहित आसपास के कई इलाकों में पानी भर गया। सेक्टर एल में जलभराव इतना अधिक रहा कि लोगों को काफी समय तक घरों में ही रहना पड़ा। जरूरी काम और दफ्तर के लिए निकले लोगों को भी रास्ते से वापस लौटना पड़ा।

स्थानीय लोगों के अनुसार, कानपुर रोड स्थित मानसरोवर के पास रेलवे लाइन के नीचे से गुजरने वाला किला मोहम्मदी ड्रेन कचरे और गाद के कारण जाम हो गया था। पानी की निकासी रुकने के बाद नाले का पानी वापस कॉलोनी की ओर आने लगा। इसके चलते कुछ ही समय में आसपास की सड़कें जलमग्न हो गईं।जानकीपुरम विस्तार में भी कई मार्गों पर पानी भर गया। लोगों ने आरोप लगाया कि नालों की सफाई को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा चिनहट और पुराने लखनऊ के हुसैनाबाद इलाके में भी जलभराव से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।जलभराव के कारण कई वाहन रास्ते में बंद हो गए। सेंट टेरेसा स्कूल के आसपास कारें पानी में फंस गईं, जबकि दोपहिया वाहन चालकों को भी परेशानी हुई। कुछ ई-स्कूटर चालकों को अपने वाहन धक्का देकर पानी से बाहर निकालना पड़ा।

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स्थिति की जानकारी मिलने के बाद नगर निगम की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचीं और पानी निकालने का काम शुरू किया। अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार राव और जोनल अधिकारी आशीष कुमार सिंह ने मौके पर पहुंचकर जल निकासी व्यवस्था का जायजा लिया। कुछ इलाकों में पानी निकाल दिया गया, हालांकि निचले क्षेत्रों में समस्या बनी रही।वहीं, सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने विधानसभा में क्षेत्र में जलभराव का मुद्दा उठाया। उन्होंने जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 10 प्रमुख नाला परियोजनाओं के निर्माण और उनके लिए वित्तीय स्वीकृति की मांग की। उनका कहना है कि तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र में जलभराव से निपटने के लिए स्थायी जल निकासी व्यवस्था जरूरी है।

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