वाराणसी। शहर में शनिवार को मौसम सामान्य बना रहा। अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि हवा की रफ्तार 5 किलोमीटर प्रति घंटा रही। 57 प्रतिशत नमी के कारण लोगों को दिनभर उमस का सामना करना पड़ा।मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल प्रदेश में मानसून की गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं, लेकिन अगस्त के पहले सप्ताह में इसके फिर सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से पूर्वी उत्तर प्रदेश, विशेषकर वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में 4 अगस्त तक अच्छी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि बारिश बढ़ने से तापमान में गिरावट आएगी और उमस से भी राहत मिलेगी।
उधर, गंगा नदी का जलस्तर फिलहाल स्थिर बना हुआ है। केंद्रीय जल आयोग के मिडल गंगा डिवीजन के अनुसार शनिवार को गंगा का जलस्तर 61.92 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरे के निशान 71.262 मीटर से काफी नीचे है।हालांकि नदी में तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने छोटी नावों के संचालन पर रोक जारी रखी है। सुरक्षा के मद्देनजर घाटों पर निगरानी बढ़ाई गई है और नाविकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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गौरतलब है कि वाराणसी में गंगा का अब तक का सर्वाधिक बाढ़ स्तर 73.901 मीटर 9 सितंबर 1978 को दर्ज किया गया था, जब शहर के कई निचले इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए थे। वर्तमान जलस्तर उस ऐतिहासिक स्तर से काफी नीचे होने के कारण प्रशासन और आम लोगों ने राहत की सांस ली है।इसी बीच मंडलायुक्त ने बाढ़ बचाव तैयारियों की वर्चुअल समीक्षा बैठक की। उन्होंने बाढ़ संभावित क्षेत्रों की निगरानी, नावों और राहत सामग्री की उपलब्धता, बाढ़ चौकियों की सक्रियता, तटबंधों की नियमित जांच तथा आपातकालीन संचार व्यवस्था को मजबूत रखने के निर्देश दिए।
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मंडलायुक्त ने अधिकारियों से कहा कि जलस्तर और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सामग्री, पेयजल, चिकित्सा सुविधाएं और आवश्यक राहत सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जाए। साथ ही गोवंश की सुरक्षा, मेडिकल टीम, पुलिस गश्त, लेखपाल और महिला स्टाफ की रोस्टरवार तैनाती तथा बच्चों के लिए दूध, चना और गुड़ की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
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