श्रीसीता जी, साहित्य-सृजन और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से रामायण रिसर्च काउंसिल की ओर से बुधवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र स्थित मालवीय सभागार में ‘रामायणी सम्मान’ समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति, अध्यात्म, संगीत और रामायण परंपरा से जुड़े देशभर के विद्वानों व विशिष्ट लोगों ने सहभागिता की।समारोह में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी कुमार चौबे और प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा समेत कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। सभागार में साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संस्कृति अनुरागियों की भी बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन, नैतिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों का महत्वपूर्ण आधार है। भगवान श्रीराम के आदर्शों के साथ माता सीता का त्याग, धैर्य, साहस और स्वाभिमान भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति का प्रतीक है।समारोह में साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के साथ युवा पीढ़ी को भारतीय परंपराओं, ग्रंथों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक दौर में अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बचाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अनूप जलोटा की मौजूदगी ने समारोह में विशेष आकर्षण जोड़ा। भक्ति संगीत और रामायण की सांस्कृतिक चेतना पर उनके विचारों ने लोगों को भावविभोर किया। इस दौरान रामायण, साहित्य, संस्कृति और भारतीय परंपरा के क्षेत्र में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को ‘रामायणी सम्मान’ से सम्मानित किया गया।रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा आयोजित समारोह में भारत अध्ययन केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय सह-आयोजक रहा। कार्यक्रम के माध्यम से रामायण के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और साहित्य-संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया गया।



