सावन पूर्णिमा पर काशी में गूंजा वैदिक मंत्रोच्चार, ब्राह्मणों ने किया श्रावणी उपाकर्म

सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर काशी में श्रावणी उपाकर्म की परंपरा श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ निभाई गई। गंगा के बढ़े जलस्तर के बावजूद काशी के विभिन्न घाटों पर बड़ी संख्या में ब्राह्मणों और बटुकों ने गंगा स्नान कर हेमाद्रि संकल्प, दशविध स्नान, ऋषि तर्पण, देव-पितृ तर्पण और सूर्य पूजन किया। घाटों पर वैदिक मंत्रोच्चार से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

काशी विश्वनाथ मंदिर धाम के गंगा द्वार पर सतुआ बाबा आश्रम के पीठाधीश्वर संतोष दास जी के सानिध्य में सैकड़ों ब्राह्मणों ने श्रावणी उपाकर्म संपन्न किया। गंगा तट पर स्नान और संकल्प के बाद ब्राह्मणों ने विधि-विधान से ऋषियों का तर्पण किया और भगवान सूर्य की आराधना कर ओज, तेज एवं आध्यात्मिक ऊर्जा की कामना की।

श्रावणी उपाकर्म के दौरान पुराने यज्ञोपवीत का विधिपूर्वक त्याग कर नए यज्ञोपवीत का पूजन किया गया और उसे धारण किया गया। वैदिक परंपरा में इस अनुष्ठान का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि श्रावणी पूर्णिमा पर उपाकर्म के माध्यम से ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक संकल्प लिया जाता है।

गंगा का जलस्तर बढ़ा होने के कारण घाटों पर सुरक्षा को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती गई। इसके बावजूद श्रद्धालुओं और ब्राह्मणों में उपाकर्म को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। मंत्रोच्चार, तर्पण और सूर्य पूजन के बीच काशी के घाट वैदिक आस्था और परंपरा से सराबोर नजर आए।



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