वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही घाटों की रफ्तार बदलने लगी है। जलस्तर बढ़ने से जहां नाविकों और घाट किनारे कारोबार करने वाले दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है, वहीं कई घाटों का आपसी संपर्क भी टूट गया है। घाटों के आसपास बने छोटे मंदिर भी पानी की चपेट में आने लगे हैं। अंतिम संस्कार से जुड़े घाटों पर भी जगह की कमी सामने आने लगी है।
अस्सी घाट के नाविक आकाश निषाद बताते हैं कि गंगा का जलस्तर बढ़ने पर दिन की अपेक्षा रात में अधिक सतर्क रहना पड़ता है। अचानक पानी बढ़ने से नावों के बहने का खतरा बना रहता है। आकाश के पास अस्सी घाट पर पांच नाव और एक देसी क्रूज है। उनके मुताबिक जलस्तर बढ़ने का सीधा असर नाविकों की रोजी-रोटी पर पड़ता है।
दुकानदारों की भी बढ़ी चिंता
नाविक मुन्ना के मुताबिक सावन के दौरान गंगा का जलस्तर उस स्तर तक नहीं पहुंचा था, जिससे दुकानों को तत्काल हटाना पड़े। हालांकि अब पानी दोबारा बढ़ने से घाट किनारे कारोबार करने वाले दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है।दुकानदारों का कहना है कि पानी बढ़ने पर दुकानें बंद करनी पड़ती हैं, जिसका सीधा असर परिवार की आमदनी पर पड़ता है। कई बार हजारों रुपये का नुकसान होता है और तीन महीने तक दुकानें नहीं खुल पातीं। इस दौरान कारोबार बंद रहता है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई, भोजन, किराया और अन्य घरेलू खर्च जारी रहते हैं। ऐसे में कई परिवार बचत या उधार के सहारे यह समय गुजारते हैं।
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84 घाटों का संपर्क टूटा, 100 से अधिक छोटे मंदिर पानी में
गंगा का जलस्तर बढ़ने से काशी के घाटों की तस्वीर भी बदलने लगी है। पानी ऊपर चढ़ने के कारण 84 घाटों का आपसी संपर्क टूट गया है। घाटों के आसपास बने 100 से अधिक छोटे मंदिर भी पानी की चपेट में आ गए हैं।
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अंतिम संस्कार में भी आ रही परेशानी
घाट पर मौजूद राज बाबू चौधरी बताते हैं कि सीढ़ियों पर शवदाह होने के कारण अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त जगह नहीं बच रही है। एक साथ कई शव आने पर उनके बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। इससे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने में परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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