वाराणसी के केदारखंड स्थित सोनारपुरा-केदारघाट मार्ग पर प्राचीन श्री चिंतामणि गणेश मंदिर में गणेश उत्सव और चतुर्थी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। मान्यता है कि भगवान चिंतामणि गणेश भक्तों की मानसिक, शारीरिक और सांसारिक चिंताओं को दूर करते हैं। प्रत्येक बुधवार और विशेष पर्वों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चिंतामणि गणेश को केदारखंड का प्रथम अधिपति और काशी के 56 विनायकों में विशेष स्थान प्राप्त है। मंदिर के प्रधान पुजारी महंत चल्ला सुब्बाराव शास्त्री के अनुसार, यहां भगवान गणेश की स्वयंभू दक्षिणावर्त प्रतिमा विराजमान है, जो त्रिनेत्रधारी स्वरूप में है। प्रतिमा के ऊपर शुभ-लाभ और नीचे रिद्धि-सिद्धि अंकित हैं। श्रद्धालु यहां दूर्वा, मोदक और लावा अर्पित कर भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
गणेश उत्सव और विशेष चतुर्थी पर मंदिर में छप्पन भोग और भव्य श्रृंगार किया जाता है। भगवान को 51 किलो के लड्डुओं का भोग लगाया जाता है और मंदिर परिसर को फूलों, फलों व पत्तियों से सजाया जाता है। स्थानीय मान्यता है कि लगातार पांच दिनों तक श्रद्धा के साथ चिंतामणि गणेश के दर्शन-पूजन करने से जीवन के विघ्न और कष्ट दूर होते हैं। शाम की महाआरती और भजन संध्या के दौरान पूरा क्षेत्र ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से गूंज उठता है।


