श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा वाचक पंडित प्रवीण पांडेय महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य प्राकट्य की कथा सुनाई। श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग आते ही पूरा कथा पंडाल भक्ति और उल्लास से सराबोर हो गया। श्रद्धालु जय श्रीकृष्ण के जयघोष के साथ झूम उठे और पुष्पवर्षा कर जन्मोत्सव मनाया।
कथा के प्रमुख जजमान प्रवीण राय ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर कार्यक्रम का शुभारंभ कराया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। कथा के दौरान वसुदेव-देवकी, कंस के अत्याचार, श्रीकृष्ण के गोकुल पहुंचने और उनकी बाल लीलाओं से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
पंडित प्रवीण पांडेय महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा सुनने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, धर्म, प्रेम, करुणा और सदाचार के मार्ग पर ले जाने की प्रेरणा देती है। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण और भौतिकतावादी दौर में भागवत कथा मनुष्य को आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।
श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग के दौरान भजनों और जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन सुनकर भाव-विभोर नजर आए। कथा के समापन पर आरती हुई, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की।
प्रमुख जजमान प्रवीण राय ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा धार्मिक एवं आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आगामी कथा में भी अधिक संख्या में पहुंचने और भगवान के संदेशों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।


