भारतीय दर्शन, जैन तर्कशास्त्र और ज्ञानमीमांसा के अध्ययन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से करौंदी स्थित पार्श्वनाथ विद्यापीठ में गुरुवार को 15 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर), नई दिल्ली के प्रायोजन में आयोजित यह कार्यशाला 5 नवंबर तक चलेगी। इसका विषय आचार्य माणिक्यनन्दी रचित ‘परीक्षामुखसूत्र’ और जैन तर्कशास्त्र एवं ज्ञानमीमांसा में उसकी भूमिका है।
उद्घाटन समारोह में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के पूर्व अधिष्ठाता प्रो. एस.के. सिंघई ने की। एल.डी. इंस्टीट्यूट ऑफ इंडोलॉजी, अहमदाबाद के पूर्व निदेशक प्रो. जे.बी. शाह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। पार्श्वनाथ विद्यापीठ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुंवर विजयानन्द सिंह सम्मानित अतिथि तथा वरिष्ठ सदस्य सतीश सी. जैन विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यशाला का आयोजन विद्यापीठ के निदेशक प्रो. विजय शंकर शुक्ल के मार्गदर्शन और संयोजक डॉ. श्री प्रकाश पाण्डेय के संयोजन में किया जा रहा है। आचार्य माणिक्यनन्दी का ‘परीक्षामुखसूत्र’ जैन दर्शन का महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें प्रमाण, प्रत्यक्ष एवं परोक्ष ज्ञान और ज्ञान की प्रामाणिकता जैसे विषयों का तार्किक विवेचन किया गया है। कार्यशाला का उद्देश्य ग्रंथ के दार्शनिक सिद्धांतों का व्यवस्थित अध्ययन कर शोधार्थियों और विद्वानों को भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराना है। साथ ही ज्ञान, सत्य, तर्क और प्रमाण से जुड़े प्रश्नों पर अकादमिक विमर्श को प्रोत्साहित करना है।


