असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी पर्व मंगलवार को बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के केंद्रीय खेल मैदान में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान 56 साल पुरानी परंपरा में बदलाव करते हुए पहली बार दस सिरों के बजाय एक सिर वाले रावण के पुतले का दहन किया गया। 70 फीट ऊंचे रावण के पुतले का 20 फीट का सिर आकर्षण का केंद्र रहा। इसके साथ 65 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और 60 फीट ऊंचे मेघनाद के पुतलों का भी दहन किया गया।
कार्यक्रम में रूपक रामलीला के मंचन और आकर्षक आतिशबाजी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पुतलों में आग लगते ही मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। समारोह के मुख्य अतिथि बरेका के महाप्रबंधक आशुतोष पंत रहे। सर्वप्रथम उन्होंने देव स्वरूप का माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। मुख्य अतिथि का स्वागत उन्हें अंगवस्त्र स्मृति चिन्ह प्रदान कर किया गया. इसके बाद प्रभु श्री राम माता सीता व लक्ष्मण जी मंच पर पहुंचे. रामलीला के प्रसंगों ने भगवान श्रीराम के आदर्शों, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने तथा अहंकार एवं अन्याय का त्याग करने का संदेश दिया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। वहीं, मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दुष्ट शक्तियों पर विजय प्राप्त की थी। इसी उपलक्ष्य में दशहरा मनाया जाता है। रावण दहन मनुष्य को अहंकार, क्रोध, लोभ और अन्य बुराइयों का त्याग कर सत्य, मर्यादा एवं सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
समारोह के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रवेश द्वारों पर पहचान पत्र और वैध प्रवेश पास के आधार पर आवागमन सुनिश्चित किया गया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग, चिह्नित लेन और नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा के लिए आरआरएफ और स्काउट-गाइड की टीमें भी तैनात रहीं। धार्मिक आस्था और उल्लास के बीच संपन्न हुए इस आयोजन ने लोगों को बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया।



