भारत सेवाश्रम संघ की सिगरा शाखा के शताब्दी वर्ष समारोह में आध्यात्मिकता और भारतीय शास्त्रीय संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। भव्य आयोजन में प्रख्यात तबला वादक पंडित राजेश मिश्र ने अपनी शानदार प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे संत-महात्माओं के अभिनंदन और सम्मान ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की।
पंडित राजेश मिश्र के साथ पंडित सर्वोत्तम मिश्रा और प्रांजल सिंह ने संगत की। कलाकारों ने सुर और ताल का मनोहारी समन्वय प्रस्तुत किया। तबले की सधी हुई थाप और शास्त्रीय संगीत की मधुर लय से समारोह स्थल गूंज उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं और संगीतप्रेमियों ने कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की।
कार्यक्रम का संयोजन समाजसेवी ई. नमित रंजन पाठक ने किया। उन्होंने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ का शताब्दी वर्ष संस्था की सेवा, संस्कार, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रतीक है। संस्था ने अपनी सेवा परंपरा के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। समारोह की व्यवस्थाओं में भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के मुख्य सचिव स्वामी पुण्यानंद जी महाराज का मार्गदर्शन रहा। वहीं, उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम से पधारे प्रियव्रतानंद जी महाराज ने संत-महात्माओं और अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया। स्वामी ब्रह्ममयानंद जी महाराज ने देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए संत-महात्माओं का अभिनंदन किया।
समारोह में श्रद्धालुओं, समाजसेवियों, गणमान्य नागरिकों और संगीतप्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। इस दौरान संघ की सौ वर्षों की सेवा यात्रा, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों को याद किया गया। शास्त्रीय संगीत की मनोहारी प्रस्तुति और संत-महात्माओं के सम्मान के साथ समारोह का वातावरण आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर रहा।


