जन्माष्टमी की रात लखनऊ के KGMU ट्रॉमा सेंटर में इंसानियत और डॉक्टरों की जिम्मेदारी की एक मिसाल देखने को मिली। 3 साल का कार्तिक घर की छत से खेलते-खेलते 20 फीट नीचे गिर गया। हादसे में सिर और कंधे के आर-पार लोहे की ग्रिल घुस गई। परिजन उसे देर रात करीब 12 बजे गंभीर हालत में KGMU ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे।संयोग ऐसा था कि उसी रात न्यूरोसर्जन डॉ. अंकुर बजाज की मां कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती थीं और उनकी हालत भी नाजुक बनी हुई थी। मां का इलाज चल रहा था, लेकिन सूचना मिलते ही डॉ. बजाज ने बड़े भाई को मां की देखरेख में छोड़ दिया और खुद अस्पताल पहुंचकर बच्चे की जान बचाने में जुट गए।डॉ. अंकुर ने बताया कि बच्चे की स्थिति देखकर ऐसा लग रहा था मानो महाभारत में भीष्म पितामह बाणों की शैय्या पर लेटे हों। सबसे बड़ी चुनौती ग्रिल को काटना था।
आधी रात में वेल्डर को बुलाना आसान नहीं था, लेकिन कई प्रयासों के बाद वेल्डर आया और मानवता दिखाते हुए उसने पैसे लेने से इनकार कर दिया।इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने करीब 4 घंटे तक लगातार ऑपरेशन किया और बच्चे के सिर व कंधे से ग्रिल को निकालकर उसकी जिंदगी बचाई।इस सर्जरी की खासियत यह रही कि जहां एक कॉरपोरेट अस्पताल ने इसका खर्च 15 लाख रुपये बताया था, वहीं KGMU में यह ऑपरेशन मात्र 25 हजार रुपये में सफलतापूर्वक कर दिया गया।ऑपरेशन टीम में न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. बी.के. ओझा, डॉ. अंकुर बजाज, डॉ. सौरभ रैना, डॉ. जेसन, डॉ. बसु, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. कुशवाहा और डॉ. मयंक सचान सहित ट्रॉमा सर्जरी विभाग की डॉ. अनीता मौजूद रहीं।फिलहाल कार्तिक पीडियाट्रिक ICU वॉर्ड में वेंटिलेटर सपोर्ट पर है और डॉ. संजीव वर्मा की निगरानी में उसका इलाज जारी है।
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