मोती-रत्न के दिव्य श्रृंगार से आलोकित हुई मां कुष्मांडा, दर्शन को उमड़ा जनसैलाब

पावन अवसर पर वाराणसी स्थित कुष्मांडा देवी दुर्गा माता मंदिर में आज माता का अद्भुत मोती-रत्न से भव्य श्रृंगार किया गया। जैसे ही पट खुले, दर्शनार्थियों की लंबी कतारें मंदिर परिसर से बाहर तक फैल गईं और वातावरण “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा। फूलों, रंगीन झालरों और पारंपरिक तोरणों से सजे परिसर ने उत्सवमय माहौल को और मनोहर बना दिया।मंदिर के पुजारियों ने बताया कि माता कुष्मांडा जो नवदुर्गा में अष्टमी शक्ति मानी जाती हैं, इस दिव्य श्रृंगार के दर्शन से सुख-समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। भक्तों ने नारियल, मिठाई और पुष्प अर्पित कर मनोकामनाएँ मांगीं। भोग के बाद प्रसाद वितरण का क्रम पूरे दिन चलता रहा, जिसमें महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग पंक्तियों की व्यवस्था की गई।

भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने अतिरिक्त स्वयंसेवक तैनात किए। प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग बनाए गए, ताकि दर्शन सुचारु रूप से होते रहें। प्राथमिक चिकित्सा सहायता और खोया-पाया केंद्र भी सक्रिय रहा। भक्तों की सुविधा के लिए पेयजल व्यवस्था और छायादार प्रतीक्षा क्षेत्र उपलब्ध कराए गए।सुबह से शुरू हुआ विशेष पूजन-अर्चन देर शाम तक चलता रहा। सायंकालीन आरती में हजारों श्रद्धालु दीप-प्रज्वलन के साथ शामिल हुए और मां के समक्ष सामूहिक आरती-संकल्प किया। आरती के समय घंटे-घड़ियाल और शंखनाद से मंदिर परिसर दिव्य स्पंदन से भर उठा।कई श्रद्धालुओं ने इसे “दुर्लभ दर्शन” बताते हुए कहा कि मोती-रत्न से सजे अलौकिक रूप ने भक्ति और आस्था को नई ऊर्जा दी। मंदिर समिति ने आगंतुकों से अपील की कि वे दर्शन के दौरान अनुशासन बनाए रखें, प्रसाद और पुष्प केवल निर्धारित स्थानों पर ही अर्पित करें और वरिष्ठ नागरिकों/बच्चों को प्राथमिकता दें।मां कुष्मांडा के दिव्य श्रृंगार के साक्षी बने वाराणसीवासी और बाहर से आए भक्तों ने इस अनूठे आयोजन को अविस्मरणीय बताया आस्था, सौंदर्य और व्यवस्था का संगम, जिसे देखने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।

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