सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आवारा कुत्तों पर नई गाइडलाइन

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर लंबी सुनवाई के बाद बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि जिन कुत्तों का नसबंदी और टीकाकरण हो चुका है, उन्हें उनके मूल क्षेत्र में ही छोड़ा जाएगा, जबकि आक्रामक और रेबीज़ से पीड़ित कुत्तों को आश्रय गृहों में रखा जाएगा। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि अब सड़कों, पार्कों या कॉलोनियों में कहीं भी कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक रहेगी। नगर निगम और संबंधित प्राधिकरण तय स्थानों को “फीडिंग ज़ोन” के रूप में चिन्हित करेंगे और केवल वहीं पर कुत्तों को खाना दिया जा सकेगा। इसके अलावा कोर्ट ने यह व्यवस्था भी की है कि कोई भी व्यक्ति या संगठन यदि इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहता है तो उसे रजिस्ट्री में डिपॉज़िट देना होगा। 

व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने वालों को 25 हज़ार रुपये और किसी एनजीओ को 2 लाख रुपये जमा करने होंगे। इस राशि का उपयोग डॉग शेल्टर और अन्य प्रबंधन कार्यों में किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कुत्ता पालने या गोद लेने के लिए अब तय नियमों के अनुसार आवेदन करना अनिवार्य होगा, ताकि गोद लिए गए कुत्ते दोबारा सड़कों पर न छोड़े जाएँ। कोर्ट का यह आदेश न केवल आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा और पशु-कल्याण दोनों को संतुलित करने की कोशिश भी है।

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