माँ गंगा निषादराज सेवा न्यास, वाराणसी ने प्रशासन को प्रार्थना पत्र सौंपकर नाव संचालन की अनुमति देने की माँग की है। संगठन ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान देने वाले निषाद समाज का जीवन आज गंभीर संकट में है।न्यास के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि गंगा पारंपरिक रूप से उनकी आजीविका का आधार रही है, लेकिन प्रशासन द्वारा नाव संचालन पूरी तरह बंद कर देने से समाज की रोज़ी-रोटी छिन गई है। उनका कहना है कि बाहर से आए पूँजीपतियों को लाभ पहुँचाने के लिए निषाद समाज की नावों पर रोक लगा दी गई है, जबकि अवैध रूप से अन्य लोग नाव व कुज चला रहे हैं। इतना ही नहीं, गंगा आरती में श्रद्धालुओं को बैठाकर दर्शन कराने पर भी रोक लगा दी गई है।
संगठन के महामंत्री राकेश साहानी ‘बबलू’ ने बताया कि नाव संचालन ठप हो जाने से पूरे निषाद समाज का आर्थिक ढांचा टूट गया है। बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की दवाई और परिवार का पेट पालना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि निषाद समाज न केवल गंगा की धारा से जुड़ा हुआ है, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख हिस्सा रहा है। ऐसे में नाव संचालन पर रोक लगाना उनके अस्तित्व पर संकट खड़ा कर रहा है।न्यास के अध्यक्ष प्रमोद माँझी और अन्य पदाधिकारियों ने प्रशासन से अपील की है कि नाव संचालन की अनुमति तत्काल प्रदान की जाए, ताकि निषाद समाज को रोज़गार और सम्मानजनक जीवन मिल सके। उन्होंने कहा कि यदि उनकी माँग पूरी नहीं होती तो समाज बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
