सीतापुर से 40 किमी दूर मां ललिता देवी आदिशक्ति पीठ पर नवरात्रि पर श्रद्धालुओं का भारी उत्साह

सीतापुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित मां ललिता देवी आदिशक्ति पीठ नवरात्रि के अवसर पर आस्था का बड़ा केंद्र बन गया है। भक्तों का मानना है कि चक्र तीर्थ कुंड में स्नान करने और मां ललिता देवी के दर्शन करने से मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। नैमिषारण्य में लगभग 200 साल पुराना यह मंदिर अट्ठासी हजार ऋषियों की तपोभूमि के रूप में भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सतयुग में देवताओं ने तपस्या के लिए सर्वोत्तम स्थान खोजने हेतु भगवान ब्रह्मा से मार्गदर्शन मांगा।

 तब ब्रह्मा ने मनोमय चक्र उत्पन्न किया और कहा कि जहां यह चक्र गिरेगा, वही स्थान तपस्या के लिए श्रेष्ठ होगा। यही चक्र नैमिषारण्य में गिरा और धरती को भेदने लगा। कहा जाता है कि चक्र पाताल तक पहुंचने लगा, तब देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की। शिवजी के आशीर्वाद से आदिशक्ति मां ललिता प्रकट हुईं और चक्र की गति रोककर पृथ्वी को प्रलय से बचाया। यही चक्र आज चक्रतीर्थ कुंड के रूप में स्थापित है। एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान होने पर उनकी पत्नी सती ने यज्ञकुंड में आत्मदाह किया। इससे क्रोधित होकर शिवजी ने यज्ञ का विध्वंस किया और सती के पार्थिव शरीर को लेकर भटकने लगे। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 108 टुकड़ों में विभाजित किया। जहां-जहां ये टुकड़े गिरे, वहां शक्तिपीठ बने। नैमिषारण्य में सती का हृदय भाग गिरा, जिससे यह स्थान मां ललिता देवी सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ। नवरात्रि के दौरान यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। मंदिर प्रशासन ने सभी सुविधाओं के साथ साथ सुरक्षा के इंतजाम भी किए हैं। 

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