बीएचयू में RSS भवन पुनः संचालित कराने का मामला: अदालत ने विश्वविद्यालय को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया

 काशी हिंदू विश्वविद्यालय बीएचयू में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS भवन के पुनः संचालन से जुड़े मामले की सुनवाई सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में हुई। वादी प्रमील पांडेय के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई लिखित जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है।इस पर न्यायालय ने बीएचयू प्रशासन को निर्देश दिया कि आगामी तिथि तक अपना जवाब दाखिल करें और उसकी एक प्रति वादी या उनके अधिवक्ता को उपलब्ध कराई जाए। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2025 को होगी।वादी प्रमील पांडेय, जो सुंदरपुर स्थित कौशलेश नगर कॉलोनी के निवासी हैं, का दावा है कि बीएचयू परिसर में आरएसएस की शाखा की शुरुआत वर्ष 1931 में हुई थी। इसके कुछ वर्षों बाद महामना पं. मदन मोहन मालवीय की पहल पर 1937-38 में दो कमरों का स्थायी संघ भवन तैयार कराया गया था। उस समय के कुलपति राजा ज्वाला प्रसाद के प्रयास से यह भवन बना।

वादी के अनुसार, यह भवन लंबे समय तक सक्रिय रहा, लेकिन इमरजेंसी काल के दौरान 22 फरवरी 1976 को तत्कालीन कुलपति कालूलाल माली के कार्यकाल में प्रशासन ने रातों-रात इसे गिरवा दिया। प्रमील का कहना है कि यह ऐतिहासिक भवन न केवल संघ के लिए, बल्कि बीएचयू की सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर का हिस्सा था, जिसे बिना किसी उचित कारण के ध्वस्त किया गया।अदालत ने विश्वविद्यालय को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह अपना जवाब समय पर दाखिल करे।

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