उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय ने पद से इस्तीफा दे दिया है। 22 सितंबर को दिया गया उनका इस्तीफा 26 सितंबर को मंजूर कर लिया गया। उनके कार्यकाल को महज एक साल ही पूरा हुआ, जिसमें केवल असिस्टेंट प्रोफेसर की एक ही परीक्षा कराई जा सकी। वहीं TGT-PGT की परीक्षा तीन बार टल चुकी है और अब तक आयोजित नहीं हो पाई। अध्यक्ष पद खाली होने से आयोग का कामकाज ठप हो गया है। फिलहाल आयोग के वरिष्ठ सदस्य रामसूचित को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया है। नए अध्यक्ष की नियुक्ति कब होगी, इस पर फिलहाल कोई स्पष्टता नहीं है। इस स्थिति से 40 लाख से अधिक प्रतियोगी अभ्यर्थियों पर असर पड़ेगा। इनमें करीब 13.6 लाख TGT-PGT के परीक्षार्थी और जनवरी में प्रस्तावित TET के लिए संभावित 30 लाख अभ्यर्थी शामिल हैं।
छात्र संगठनों ने इस इस्तीफे पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि आयोग लगातार विवादों में रहा और परीक्षाओं की तारीखें घोषित कर बार-बार बदली गईं। कई प्रतियोगी इसे "दबाव" का नतीजा मान रहे हैं, जबकि प्रो. पांडेय ने इस्तीफे की वजह व्यक्तिगत कारण बताए हैं। युवा मंच और संयुक्त प्रतियोगी छात्र संगठनों ने परीक्षा नियंत्रक पर भी कार्रवाई की मांग की है। छात्रों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और बार-बार परीक्षाओं का टलना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। गौरतलब है कि प्रो. कीर्ति पांडेय उच्च शिक्षा में 40 साल का अनुभव रखती हैं। वह गोरखपुर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रहीं और 2023 में डीन (आर्ट्स) बनीं। 1 सितंबर 2024 को उन्हें आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। आयोग की स्थापना पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद एक बार फिर भर्ती परीक्षाओं पर संकट खड़ा हो गया है।
